कर्ण महाभारत का सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर था ।
अर्जुन से भी श्रेष्ठ ।
पर वो शल्य के कारण मात खा गया ।
जब अंतिम दिन कर्ण और अर्जुन का युद्ध होना था तो कौरवों में विचार विमर्श होने लगा कि यूँ तो कर्ण धनुर्विद्या में अर्जुन से इक्कीस है पर चूंकि अर्जुन के सारथी स्वयं भगवान कृष्ण हैं ........ और युद्ध मे सारथी का बहुत ज़्यादा महत्व होता है ........ और कृष्ण जैसा सारथी तो पूरे महाभारत में कोई न था ........ काम चलाऊ सारथी की खोज शुरू हुई ....... पाया गया कि मामा शल्य रथ हांकने में कृष्ण को टक्कर दे सकते हैं ।
शल्य पहले तो कर्ण का सारथी बनने को तैयार ही न हुआ ....... भो**वाले कि Ego बीच मे आ गयी ....... बोला कि मैं इस सूत पुत्र का सारथी ? कभी नही .......
खैर दुर्योधन ने किसी तरह हाथ पैर जोड़ के मना लिया ........
सारथी का काम सिर्फ रथ हांकना ही नही होता था बल्कि वो पूरे युद्ध की planning करता था ....... strategy बनाता था ....... योद्धा को Motivate करता था ........ वही युद्ध भूमि में योद्धा का Coach होता था ......... पर शल्य एक नंबर का गद्दार था ......... उसने रथ पे बैठते ही कर्ण को Demoralize करना शुरू कर दिया ........ वो कर्ण से बोला की तेरी औकात क्या है अर्जुन के सामने ?
अर्जुन तो तुझे बच्चों की तरह खिला के मारेगा ........
अभी भी मौका है ....... जान बचा ....... भाग ले .......
सारे युद्ध मे शल्य कर्ण को हतोत्साहित करता रहा और उसने जानबूझ के कर्ण का रथ कीचड़ में फंसा दिया ........ फिर भो** वाला पहिया निकालने खुद रथ से नीचे नही उतरा ....... कर्ण से बोला तू उतर के पहिया निकाल ........ बताओ साला ....... स्टेपनी ड्राइवर को बदलनी चेय्ये न ?????
कर्ण बेचारा धनुष बाण रख , जीन बख्तर उतार के Tyre change करने लगा ........ अर्जुन ने मारा बाण गर्दन उतार ली ........

समझे मितरों ??????
तुम्हारे रथ पे भी शल्य चढ़ आया है ।
अपने बीच मे मौजूद शल्य को पहचानो और भो** वाले को ऐसे लखेद लखेद के मारो जैसे गांव में लौंडे पागल कुत्ते को मारते हैं ।

शल्य आपको demoralize करके मरवा देगा ।
Motivated रहो ........
शल्य पहचानो
शल्य मारो। अजीत दद्दा की पोस्ट

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